We The People – Behind A Veil Book Review

Author: LALIMA YADAV, Language: English (Poem), Publisher: MOMENT PUBLICATION, Price – 190 (Flipkart), My Rating – 4.5/5

न जाने कहा छुपी है, कोई ढूढ़ के लाओ उसे
मेरे शहर में इंसानियत की जरुरत बहुत है…. “असीर” 
ललिमा यादव, 19 वर्षीय एक ऐसी लेखिका, जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया की जिस समाज में मैं रह रहा हूँ क्या सचमुच वो रहने लायक स्थान है ? क्या यहाँ किस शख्स पर भरोसा किया जा सकता है ? क्या यहाँ एक छोटे बच्चे का जीवन इतना ही है की उसे मजदूरी कर पेट भरना पड़े ? क्या यहाँ एक लड़की का गुनाह सिर्फ यही है की वो एक लड़की है ? बेशक ये कोई गुनाह नहीं मगर फिर भी उसकी सजा मुकर्रर है, चाहे वो भ्रूण हत्या के रूप में हो, या फिर दहेज़ की आग में झुलसा के…. lalima की ये किताब we the people – BEHIND A VEIL कुछ ऐसी ही दिल देहला देने वाले मुद्दे उठाती है, lalima ने अपनी किताब में समाज के हर उस मुद्दे को उठाया है, जो इस समाज को खोखला करते हैं, एक माँ बाप का अपने बच्चे से दुरव्यवहार करना हो सिर्फ उसके लड़की होने की वजह से या फिर किसी बच्चे का अपने माता पिता को वृधावस्था में तनहा छोड़ देना, ये भूल के की उसे जीवन का पहला कदम अंगुली पकड़ उन्होंने ही चलाया था…. शादी जिसे इस मुल्क में दो परिवार का बंधन कहा जाता है और जिसके साथ इस पवित्र बंधन में बंधते हैं उसे जीवन साथी, अगर वही साथी शादी की पहली रात आपको सिर्फ एक जिस्म समझ उसे नोचे और परिवार दहेज़ का लालची हो ऐसे रिश्ते को क्या सचमुच पवित्र कहा जा सकता है ? इस देश की सड़कें जहाँ एक लड़की का चलना दुबर हो वजह सिर्फ इतनी की वो लड़की है, जहाँ उसे सोचना पड़े की घर से किस तरह के कपडे में निकले ताकि उसकी आबरू बची रह, कुछ ऐसे ही सवाल दिमाग में हलचल करने लगेंगे जब आप इस किताब की कविताओं को पढेंगे…. एक तवायफ का क्या दर्द होता है बेशक उसकी ज़िन्दगी जी कर ही समझा जा सकता है,मगर एहसास अगर जिंदा हो तो उसकी आँखें भी कई राज खोलेंगी, lalima ने बेहद संवेदनशील मुद्दों को, नाजुकता से साहित्य की गरिमा को ध्यान रखते हुए पन्नो पर उतारा है ….. ये महज एक किताब नहीं, यह आइना है हमारे समाज का हमारे देश का, अपने आप को इंसान कहने वालो को ये आइना है जिसमे वो जानवर नज़र आते हैं, हाँ यही है असल रूप इस समाज का, हमें इस समाज को जल्द से जल्द बदलने की कोशिश करनी होगी इससे पहले की इसके अन्दर का जानवर खूंखार रूप ले ले…. lalima को अंग्रेजी जुबां की मुनव्वर राणा कहा जाये तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा, जैसे वो उर्दू जुबां में इस समाज की हकीक़त को सबके सामने लाते हैं वैसे ही lalima ने अंग्रेजी में किया.. मैं lalima को तहे दिल से बधाई देता हूँ We the people – BEHIND A VEIL के जरिये मुझे इस समाज का असल रूप दिखाने के लिए….

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